राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! 13 घंटे की पूछताछ के बाद आरोपी से पुलिस को मिली अहम लीड, जांच तेज
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव से लंबी पूछताछ की है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं और अब बरामद साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे जांच की जा रही है।
हालांकि पुलिस ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है और कई तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। इसलिए मामले से जुड़े कई दावे अभी जांच के अधीन हैं।
13 घंटे तक चली पूछताछ
पुलिस के अनुसार, बुधवार सुबह दोनों आरोपियों को जेल से रिमांड पर लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच फैजाबाद पुलिस लाइन लाया गया।
यहां वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों से अलग-अलग कमरों में पूछताछ की गई। सुबह शुरू हुई पूछताछ देर रात तक चली और करीब 13 घंटे बाद दोनों आरोपियों को वापस जेल भेज दिया गया।
जांच अधिकारियों ने दोनों आरोपियों से अलग-अलग सवाल पूछे ताकि उनके बयानों का आपस में मिलान किया जा सके।
पहले से तैयार थी विशेष प्रश्नावली
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने दोनों आरोपियों के लिए अलग-अलग विस्तृत प्रश्नावली तैयार की थी।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर चढ़ावे की निकासी, उसकी गिनती, परिवहन, सुरक्षा व्यवस्था और पैसों के संभावित उपयोग से जुड़े कई सवाल किए।
अधिकारियों का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की श्रृंखला को समझना और यह पता लगाना है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
आरोपी के घर पहुंची पुलिस
पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस एक आरोपी रमाशंकर मिश्रा को उसके किराए के मकान पर भी लेकर गई।
वहां पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया और कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
साथ ही मकान में लगे सीसीटीवी सिस्टम का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) भी जब्त किया गया ताकि घटनाक्रम से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा सके।
पुलिस ने एहतियात के तौर पर कमरे को सील भी कर दिया है।
परिवार और परिचितों से भी पूछताछ
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के परिवार के सदस्यों और उसके कुछ परिचितों से भी पूछताछ की।
बताया गया कि पुलिस ने उसके पिता, भाई और फोटोग्राफी के कार्य से जुड़े एक करीबी व्यक्ति से भी जानकारी जुटाई।
अधिकारियों का कहना है कि सभी बयानों का मिलान अन्य साक्ष्यों के साथ किया जा रहा है।
क्या पूछताछ में कबूल किया जुर्म?
मीडिया रिपोर्टों और पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
हालांकि पुलिस ने अब तक किसी आधिकारिक प्रेस बयान में विस्तृत स्वीकारोक्ति (Confession) की पुष्टि नहीं की है।
भारतीय कानून के अनुसार पुलिस हिरासत में दिए गए बयान अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं माने जाते और उनकी पुष्टि अन्य साक्ष्यों से की जाती है।
इसी कारण जांच एजेंसियां बरामद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं।
पहले हो चुकी है नकदी और आभूषण की बरामदगी
इस मामले में पुलिस पहले ही एक आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी, चांदी के सिक्के और सोने-चांदी के आभूषण बरामद करने की जानकारी दे चुकी है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद संपत्ति का स्रोत क्या है और क्या उसका संबंध कथित चढ़ावा चोरी से है।
यदि वित्तीय लेन-देन में कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित आर्थिक दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
जमीन में निवेश की भी जांच
जांच के दौरान पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि क्या कथित रूप से चोरी की गई रकम का उपयोग जमीन या अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया।
यदि ऐसे लेन-देन के साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरे आरोपी से भी लंबी पूछताछ
मामले के दूसरे आरोपी और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव से भी कई घंटों तक पूछताछ की गई।
पुलिस के अनुसार, फिलहाल उसकी निशानदेही पर कोई नई बरामदगी नहीं हुई है।
हालांकि उसके बयानों का सत्यापन जारी है और आवश्यकता पड़ने पर उसके बैंक खातों तथा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच भी की जा सकती है।
मंदिर में क्या थी दोनों की भूमिका?
जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों की मंदिर परिसर में अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं।
पुलिस के अनुसार—
सुभाष श्रीवास्तव पूर्व बैंक कर्मचारी होने के कारण दान में प्राप्त नकदी की गिनती से जुड़े कार्यों में सहयोग कर रहे थे।
रमाशंकर मिश्रा मंदिर परिसर में पिछले कई वर्षों से कार्यरत था और बाद में उसे दानपात्र से चढ़ावे की राशि गिनती कक्ष तक पहुंचाने जैसी जिम्मेदारी भी दी गई थी।
इसी व्यवस्था की जांच करते हुए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितताएं किस प्रकार हुईं।
जांच का दायरा बढ़ सकता है
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता के साक्ष्य सामने आते हैं तो उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
साथ ही इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।
श्रद्धालुओं में चिंता
राम मंदिर देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
श्रद्धालु चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
जांच अभी जारी
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस लगातार नए साक्ष्य जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सभी आरोपों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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